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Showing posts from October, 2022

उत्साह का निवाह

उत्साह का निवाह  बिन राधिका  चरण बल  के नहीं हो सकता ,नही हो सकता । यह जो उत्साह है  यही तो हृदय का उल्लास  मन का हुलास है  जो नवल राधिका की कृपा बिन सम्भव नही ,सम्भव नही , यह उत्साह  यह उल्लास  ही प्रकाशित होगा  नवल वृन्दावन स्वरूप में श्री वृन्दावन पाप समूह को नष्ट करने की शक्ति है  श्री वृन्दावन रस भजन की  प्रेम बेलि है ।    जब तक हॄदय में श्री विपिन का प्रकाश नहीं होता  तब तक जीव विश्राम नहीं पाता , अतः   श्री ललित विपिनम को पहचाने बिन  रस की चर्चा करके रस मय होना असंभव हैं ।

आत्म तितली

*आत्म तितली* भूल जाओ यह और वह  गतिमय रहो  और आगे की और उड़ो  उड़ान बहुत है  और समय कम  तुम क्या हो  जितना उड़ोगी उतना पाओगी  रुको नही  न कुछ समझो भी स्वयं को  नही तो ठहर जाओगी  केंद्रित स्वयं पर न हो **** माया की बोल चाल  माया की देख ताक  से निकलो  और छूटो यह ही मार्ग  स्वच्छंद उड़ने का  घुमड़ने का लरहने का  थिरकने का  झूमने का गुँजाने का  हे मधुरित लहरी     तुम बहो और बहो