उत्साह का निवाह
उत्साह का निवाह बिन राधिका चरण बल के नहीं हो सकता ,नही हो सकता । यह जो उत्साह है यही तो हृदय का उल्लास मन का हुलास है जो नवल राधिका की कृपा बिन सम्भव नही ,सम्भव नही , यह उत्साह यह उल्लास ही प्रकाशित होगा नवल वृन्दावन स्वरूप में श्री वृन्दावन पाप समूह को नष्ट करने की शक्ति है श्री वृन्दावन रस भजन की प्रेम बेलि है । जब तक हॄदय में श्री विपिन का प्रकाश नहीं होता तब तक जीव विश्राम नहीं पाता , अतः श्री ललित विपिनम को पहचाने बिन रस की चर्चा करके रस मय होना असंभव हैं ।