उत्साह का निवाह

उत्साह का निवाह
 बिन राधिका  चरण बल  के नहीं हो सकता ,नही हो सकता ।
यह जो उत्साह है 
यही तो हृदय का उल्लास 
मन का हुलास है 
जो नवल राधिका की कृपा बिन सम्भव नही ,सम्भव नही ,

यह उत्साह 
यह उल्लास 
ही प्रकाशित होगा 
नवल वृन्दावन स्वरूप में

श्री वृन्दावन पाप समूह को नष्ट करने की शक्ति है 
श्री वृन्दावन रस भजन की 
प्रेम बेलि है ।
 
 जब तक हॄदय में श्री विपिन का प्रकाश नहीं होता 
तब तक जीव विश्राम नहीं पाता ,

अतः 
 श्री ललित विपिनम को पहचाने बिन  रस की चर्चा करके रस मय होना असंभव हैं ।

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