आत्म तितली

*आत्म तितली*

भूल जाओ यह और वह 
गतिमय रहो 
और आगे की और उड़ो 

उड़ान बहुत है 
और समय कम 
तुम क्या हो 
जितना उड़ोगी उतना पाओगी 

रुको नही 
न कुछ समझो भी स्वयं को 
नही तो ठहर जाओगी 

केंद्रित स्वयं पर न हो ****

माया की बोल चाल 
माया की देख ताक 
से निकलो 
और छूटो
यह ही मार्ग 
स्वच्छंद उड़ने का 
घुमड़ने का
लरहने का 
थिरकने का 
झूमने का
गुँजाने का 

हे मधुरित लहरी 
   तुम बहो और बहो

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