प्रीति रस रमणा
प्रीती ..रस ..रमणा
(प्रीती का गलित घन विलास)
देखो स्नेह की बूँदे लेके रस शिशु के पोषण हेतु
आइ प्रीती घन घमणा..
उमड़ उमड़ कर बहाती
प्रेम रस रिसाती
देखो यह दामिनी रस वर्षा ..प्रीती रस रमणा..
स्नेह रस की वृद्धि हेतु ,रस व्याकुलता उपचार हेतु ,
भिगाती शीतल झरती रस जमुना ...
प्रीती रस रमणा ...’
मौज़ों की रवानी में
भीगी भीगी ख़ुमारी में इठलाती यह प्रौढा नव रसना ..
झूमते श्रृंगारो से ,बहकते इरादों से ,
महकाती ,सजाती ,स्नेह रस विलासों को ..प्रीती रस मग्ना....
हाँ सखी ,
न मैं ,न तुम ,न वो ,न ये
मौज ही मौज बहा.......
बहा ले गयी संग अपने यह सरसीली प्रेम अर्चना ...प्रीती रस रमणा ..
सम्पूर्ण विलासों को उनका हित लौटाने
प्रेम के रोम रोम का अभिषेक करने ,
आइ ,देखो दामिनी घन घमणा..श्री प्रिया रस रमणा .प्रीती रस वर्षा ...
श्री हरिदास
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