ललित निवेदन

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          ललित ..निवेदन

सखी हो ,या फ़ूल हो कि फूलों का श्रृंगार
 
झूम हो ,की झूमका, या प्रेम सुखों का बिहार
 
प्यार हो या उत्साह या हृदय का मधुर विलास 
       
मेरी कुमुदिनी  मेरी फुलिनी मेरी नन्ही सी प्रेम उड़ान

उमड़ती उमगती रहो ऐसे ही भरती रहो मुझमें  रंग रस व्यार 

करती रहो ऐसे ही ललित ललित तृषाओ का मेरे रोम रोम मे नव नव उत्सवों का संचार
🌷🌷🌷
   श्री हरिदास

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