दिलकश

काश इतनी दिलकशी मुझमे होती 
   की तुम्हारे एक एक नाम को मैं जीती 

कितनी मजबूर हूँ अपनी चंचल हस्ती से 
   पास तुम हो मेरे ,और ढूँढती तुम्हें दूर मैं बस्ती में ..

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