कोमलता पर कोमलता का श्रृंगार
कोमल पर कोमलता का श्रृंगार
राग पर बरसती राग
आह .....
आह ......
सहज जैसे मल्हार जु प्रकट हो सेवा दे रहे हों....
संग उनके उनकी संगिनी बरसती बूँदो का किलोल ,खेलती झरित झरनो का मृदुल शोर .....
प्राण पर बन आए सखियों के ..!!
युगल हुलसन को व्याकुल ... यह झूमती विलासिनियाँ
यह ध्वनि नहीं बस ...
यह पुकार उनकी की ..झूम जाने की रुचि और ..और ..और .....
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