युगल केलि

युगल केलि ..सखी उत्साह

नील के आग़ोश में 
उमड़ उमड़ कर 
बलखाती ..इतराती..
नील नील उल्लास में 
छनक चमक कर लहराती हुलसाती 
सागर की लहर 
श्याम की श्यामला श्री प्रिया ..
संग में संग से भीगकर 
प्रेम के वेग मे बह जाती 
फिर संभलती..
पुनः डूब जाती 

   फिर उत्सव कलरव हेतु 
नील नील आगोशो में मचलाती 
आती .फिर जाती 
यह सागर की लहर ..श्री प्रिया
लौट ..लौट 
प्रेम मद रवानी में
मदन रंग भर फिर डूब जाती ...श्री प्रिया ...

यह सागर का उसकी लहरो से संग
नील में उज्ज्वल का रंग 
     प्रेम उत्साह हैं
    युगल क़ेलि उत्साह हैं

  इस उत्साह की प्यासी श्री सखियाँ

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