रँग का रमण

रँग का रमण

युगल बिहार (रस)और राग

रस से राग और राग से रास 
रास में राग और राग में रस 
  रस राग और रास ...
   जिधर से भी स्पर्श करो ..ललिता ललित स्पर्श हैं ।
युगल केलि रागों को छेड़ो तो भी ललित रस के भावों का अनुभव 
युगल रस बिहार का चिंतन मनन हो तो भी ललित बिहार के रागों मे सहज रमण..

रस का विल्सन उछ्ल्न और उसका उद्दरेक ही राग हो गया 
  राग ही रास में बदल गया


रास से राग 
राग से रस 
रस में रंग का रमण
रस गमन करते करते स्वयं हुआ रास और रास का रस और बहा तो स्वयं खिला अनंत अपनी ही प्रीतियों का राग 
और राग से फिर अपने रस स्वरूप में 
अपने रस रंग के रमण में 

यह नील पीत का रस रमण 
रचे अनंत तरंगें....
हर तरंग का रंग हैं 
हर रंग का रस हैं 
और रस का राग है
हर राग में खिला युगल रस तरंग है....
 
रस  ....से....रास...में...राग
और राग से पुनः युगल रस रंग तरंग 

प्यार से बिहार ..
  बिहार से राग प्रकट होते 

सो निश्चित की राग  से सहज बिहार दशा भी फिर खिले 

खिले खिले और मिले मिले 
यह राग रागनियाँ की प्रेम सेवा

श्री हरिदास

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