प्रेम की सारँग दशा
प्रेम की सारंग दशा श्री विपिन
महा महोत्सव
सखी ,जिधर की लताएँ पताएँ तरु पल्लव भी सारंगित हैं ऐसा श्री वृंदावन धाम महा महोत्सवो का कुंज है।
यह निभृत स्वभाव है श्री विपिन का की सहज श्याम तमाल की कुसुमित ललित लताएँ सहज आलिंगित परस्पर आबद्ध है । इनकी उरझाई ललना लाल की बंकिम प्रीति को और और मधुरित ललित और उत्सवित करती ,नव नव वलित विलसनो में ,हुलसनो में ..नवीन उत्सवों के त्रिभंगित प्रकम्पनो में ..रुचिगत ऋतुएं मधुरांग विलासो में सज सज कर परोसती ,पोषती ,सजाती स्नेह के रसों को ,रसमग्न कर भीगा जाती और पंकिम होने को ...झुमाती और और बिहरण में स्नेह मदिरा हो जाने को ..
कुंज भवन में सखियों का समूह ,प्रेमी युगल के क़ेलि कौतुक दर्शन हेतु चकोर वत तरसते सरसते हैं ..
परस्पर प्रेम रंग की सारंगाई में श्री विपिन का रोम रोम हर्षित हो हो अंगड़ाई भरे ..लहराये और तरंगित हो हो युगल को स्पंदित करे और और फ़ूलन खेलन खिलन मिलन रुचि को और बढ़ाने हेतु
यह श्री वृंदावन धाम का सारंग महामहोत्सव....
*श्री वृंदावन
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