मंगलमय दृष्टिकोण

मंगलमय दृष्टिकोण

आज की शुभ हितमय बेला पर 
एक सुमन भाव निवेदन 🙇‍♀️

श्री सखियों 
पाने की उम्मीद चाहे भजन से ही स्वयं के लिए क्यों न हो उत्साह का ह्रास करती है 
लालसा मंगल हो फिर भी स्वयं के लिए होवे तब भी बाधा उत्पन्न करेगी 

सो क्या मिलेगा क्या पाएँगे 
यह न सोचकर 
क्या सेवा निवेदन कर पाएँगे 
क्या देने को मिला  है 
कितना मिला हुआ दे पाएँगे इस पर हम चिंतन करे 
स्वयं के लिए कोई चिंतन न
क्योंकि हम स्वयं धन है अपनी धनाश्री के सेवा रूपी धन 
इसी धन की सेवा करनी है पर स्वयं के लिए इस सेवा से कोई पारितोष  की भी आशा न हो 
तो हम कृपा मे भारित होती जाएँगी 
कृपा से कृतज्ञ हुई सखी अपने पियप्यारी की हिण्डोरा उनका हिय सुख होती हैं 

जय जय श्री हित हरिवंश जु 
जय जय श्री ललिते 
जय जय श्री वृंदावन

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