माया का बोध
माया का बोध
जब जब हमें उनसे छूटने का बोध होगा
यह बोध जीव भाव माया में होगा ..
वास्तव में वे हम में ..और हम उनमें
वृंदावन भी हृदय में
पर अभी हृदय वृंदावन को अपने अंदर न देख न सजा पाया है
यह पीड़ा भी तभी तक है
जब तक हम उनका सुख नहीं रचते
तभी तक माया का प्रवेश है।
श्रीश्यामाश्याम
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