प्रेम अभंग

प्रेम अभंग

श्री प्रियतम जू का सेज श्री प्यारी जु का अंग ..
श्री प्यारी जू का ओढ़ना श्री प्यारे जु का अंग ..

श्री प्यारी का श्रृंगार श्री प्यारे जू का मन 
श्री प्यारे जू का सुख श्री प्यारी जु का संग ..

अंग संग रस मग्न पौढे प्रेम रंग ..
रूप पुंज में रस पुंज बिहरे निसंक ..

शिशिरता  में उष्णता भरे, फूले सुअंग 
आनंद की लहरी में झूमे सारंग 

खिले मिले झरे डहे..
 रोम रोम हरे भरे 
  छिन छिन, और और ,विलसे प्रेम अभंग ...

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