भाव फूल
भाव फ़ूल
रस की अनन्यता ,
रस की एकाग्रता
भावना की एकाग्रया हो
न अन्य अभिलाषा और बाहर ऊर्जा का बहाव न हो तो
तो महाभाव के फ़ूल खिल पाते हैं
यह रसिको के जीवन के नियम हैं
रस अनन्यता मात्र रस मय स्थिति
यह फ़ूल जब खिलेगा तो कोई भँवरा भी आएगा इसका रस चखने
पर जानेंगे कैसे की फ़ूल खिला हैं
जब कलेजा ,हृदय गीला गीला शीतल शीतल मधुर सा अनुभव होगा
तब अंदर की प्रेम शाखायें तुष्ट पुष्ट हो कर कुमुद रूपी स्नेह फ़ूल खिला रही हैं और खिलते ही उसकी भूमि के आर्द्रता की महक फ़ूल की ख़ुश्बू भँवरे को स्वयं आकर्षित कर लेगी ..
रस के अनुराग में नव नव रास विलास उल्लास आह्लाद उठेगा ....
जय जय श्री श्यामा श्याम 🌷
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