श्रृंगार सार
श्रृंगार सार
प्रशंसित कौतुकी स्मित मुस्कान
हे री सखी ,श्री प्यारी जू की उज्ज्वल मंद स्मिता महा श्रृंगार राज रस है
उनके इस प्रसंशित उज्ज्वल मुस्कान के कौतुक में रहस्य पर रहस्य है ..
श्री प्यारी जू का श्री प्यारे को देखकर मुस्कुरा देना मानो श्रृंगार पर श्रृंगार सजाना है ...
उनकी एक मुस्कान हित मई और हतप्रभ कर अचंभित कर देती, अनंत सुख विलास रच देती श्री प्यारी जू की इठलाती लजाई सी मुस्कान ..
नवीन केलियो के रोमांच मे उत्सव रचने ले चलती श्री चपलाँगी जू की चपल मुस्कान ..
प्यार को सजाने हेतु मधुर ताप के निवारण हेतू बिखेर देती श्री उज्ज्वले अपने अधरों पर श्रृंगार मुस्कान ..
देखो सखी मुस्कुरा कर रस भीजन हेतु रस का आवाहन करती श्री घन दामिनी की मधुर तान मुस्कान ...
अरि सखी और सुन ..
श्री मुग्धा के मुस्कान का रहस्य !!!
कोक कला मे निपुण प्रवीना
प्रीतम देखी देखी मुस्क़ात
समझ इशारा श्री प्रीतम प्यारे स्नेह रस भीजन हेतु ललचात
भृकुटि जन्य भाव तरंग गतियां दे दे श्री लाल को उकसात
मुस्कान रहस्य
श्री प्यारी का मुस्कुराना पावस के आगमन की सूचना है और भाव भंगिमाएं यह वर्षा पूर्व बादलों का गड़गड़ाना है गरजना है
और इस पावस रस में भीग जाने की चाह यह मोर रूपी प्रीतम की चाहत है
रस के बाढ़ मे बिखर आती
अधरों पर चपलता
दामिनी की दमक को देखत प्यारे लाल जू मे छाई हतप्रभता
श्री वृंदावन
श्री कुंज बिहारी श्री हरिदास 🌷🙏🌷
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