आश्रय बल
आश्रय बल
यह इतनी बड़ी सिद्धी है साक्षात कृपा की भी कृपा है कि अगर आपका दृढ़ आश्रय स्थित स्थिर रह गया है,तो एक मात्र इस आश्रय से प्यारे आपसे रीझे है ...प्रभु आपका साथ कभी न छोड़ सकते हैं ...
पर जिनको प्रभु के इलावा अन्य धर्म कर्म पर किसी व्यक्ति विशेष पर भी आश्रय हुआ
तो यह व्यभिचारिणी भक्ति है
साधन भजन न भी जिसका ढंग से चल रहा पर हरि का आश्रय उसमें ज़बर्दस्त है...मात्र इस भाव से प्यारे रीझ जाते हैं ।
वे अपने शरणागत का साधन भजन से ज़्यादा उसकी आत्मीयता पर ग़ौर करते हैं
यह सभी साधन तो उनसे अपनी एकता सिद्ध करने के लिये ही है न ...
सो सार साधन है ,साधन भजन का मधुर फल एकमात्र अनन्य आश्रय श्री हरि के ।।
श्री वृंदावन
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