साँची प्रीत

साँची प्रीत

मेरे ,तेरे भीतर रहते मेरे श्याम सुंदर 
  हर हाव भाव को पढ़ रहे जान रहे होते वे ,
न जाने कब कौन सा भाव कौन सी बात उन्हें लग जाए 
और कौतुकी श्याम 
कोई नया कौतुक रचे जीवन में 

    घबराता नहीं है प्रेमी ..क्योंकि उसे 
अब तो कोई आशा भी नहीं कोई  वस्तु व्यक्ति की पकड़ की ..न उनके प्यार और संग की ....
  प्रेमी जानता हर दिल्लगी को वे तमाशा बनाते हैं , इसी कारण से प्रेम जगत  का अपूर्ण रह जाता 
    वे एकमात्र प्रेम भोगी हैं
हम उनका भोग 
       वे अपना भोग बाँट के खाते पर कोई भोग ऐसा होता जो वे किसी को नहीं बांटना चाहते हैं 

जैसे की शबरी के बेर 
सुदामा के तंदूल 
आदि ..आदि ..
   अगर तुम उनका वह भोग हो तो संसार में असफल होगे 
संसार के प्रेम में रुचि ही ख़त्म हो जाएगी 
चाहे तुम्हारे लिए कोई प्राण भी देने को तैयार हैं 
पर तुम उसके प्रेम का उतना आदर न दे पाओगे 
क्योंकि तुम्हारी रुचि ख़त्म हुई है संसार के वस्तु व्यक्ति में 
 
और अब शुरू होगी गाड़ी साँची प्रीत की ..
तप और त्याग की 
विरह और व्याकुलता की 
अभी तक मन का बहलाव मात्र 

श्री वृंदावन 🌷🙏🌷

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