रस चाह

रस चाह

तुम अधीर न होगे श्याम रस 
   तो कैसे गौर रस बरसेगा ..

तुम न चाह करो प्यार की 
    तो कैसे प्रेम फ़ूल खिलेगा ..

तुम प्यास हो 
प्यारी मेरी पानी 
    तुम न प्यास बढ़ाओगे तो 
रस सागरी का भरा रस कैसे उमड़ेगा ..
प्यार को प्यासा चाहिए 
और प्यास को भी प्यार ..
     एक ही सुख रूप दोनो 
खेलो न फिर और और रस विलास ..

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