पूर्ण आराधना
पूर्ण आराधना
श्री प्यारी के ख़्याल में खो जाना ही सभी तीर्थों के जल में डुबकी लगाना है ..
श्री प्यारी के लीलाओं का चिंतन ही श्री वृंदावन में रमण करना हैं ..
श्री प्यारी के लिए व्याकुलता ही पारंगत भाव हैं ...
श्री प्यारी की सेवा ही श्री प्यारे का पोषण है ..
श्री प्यारी से आत्मीयता ही वास्तविक प्यार है...
हर भावो से प्यारी को दुलारना यह ही रस सार है..
मेरी लाड़ली को सदा लाल के लाड़ के संग रखना यह ही अति निज सेवा और उज्जवल ब्रज भाव है..
Comments
Post a Comment