रस बोध में देरी क्यों
रस बोध में देरी क्यों ??
रस का रस में सिर्फ़ आकर्षण है,
रस की रुचि सिर्फ़ रस है और जीव का जड़ में आकर्षण रहने से रस बोध ,रसानुभूति नहीं हो पाती
उपासक से एक त्रुटि हो जाती
वह इम्प्रेस हो जाता बहुत जल्दी
यह ही इस मार्ग का सबसे बड़ा छिद्र
हमारा रस स्वयं हमारे भीतर हैं
रस को मौक़ा दो खिलने का
पर जीव भाव यह होने न दे
कही न कही
किसी न किसी से बन्धता चला जा रहा है,
किसी से प्रभावित होना
यह आपके रस भावों की हानि करा देगा
इसीलिए जड़ संसार के विषय व्यक्ति से प्रभावित न होवें
एकमात्र युगल में आकर्षण और रुचि और मैत्री भाव सभी से
पर दिल का लुटजाना तो सिर्फ़ अपने निज रस के लिए हो
भाव संजीवनी सखी की ठाट
हम क्यों किसी से प्रभावित हो
क्यों किसी को इम्प्रेस करें
जब हमें किसी से कोई चाह नहीं ..
मेरे एकमात्र छाप मेरे प्राण युगल रस हैं और निरंतर मेरे अंग संग हैं
तो फिर बाहरी मनुहारी क्यूँ ????
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