प्रेम और आदर

प्रेम और आदर 

  बस इतना ही शेष रह जाये जीवन में 
तो रस ही शेष रहा न ...

कुछ करना भी न पड़ा 
जोड़ना भी न पड़ा ..
   सिर्फ़ प्रेम और नेम की मेड में स्थिर रहना पड़ा ..
सावधान और स्थिरता 
यह इस साधना के प्रमुख अंग 

भाव स्थिरता 
और कुसंग से सावधानी

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