पवित्रा पर प्रियतम को प्रेम संदेश
पवित्रा पर प्रियतम को प्रेम संदेश
आज मेरी लेखनी को ही अपनी प्रेम दूतिका बनाकर यह भाव पत्रिका प्यारे प्रीतम तक पहुँचा रही हूँ ...
दूर देश मे रहती एक सहेली का भाव
कहती अपनी प्रेम सहेली से :-
हे मेरी प्रेम सहेली तुम मेरी भी यह पवित्रा मेरे प्राण प्रेष्ठ को पहना आना
बाँधने से पहले मेरा स्मरण करा देना
कहना की यह ख़ाली सूत्र न ,इसके एक एक सूत में प्रेम रक्षा का प्रण भरा है ..
हे मेरी दूतिका
सजना को उनकी सखी का हाल सुना आना
कह देना की उनकी ख़ुशी में उनकी सहेली का सुख है
उनके उत्साह में मेरी उमंग हैं
हे प्रेम संदेश वाहिका ..
यह विशुद्ध हृदय के संग के उमंग का मीलित उत्सव है
पवित्र सम्बंध की रक्षा की माँग है
यह कुछ और नहीं युगल भावनाओं के संगम का अनुसंधान है..
हे मेरी दूतिका
जब यह संदेश ले जाना तो तुम स्वयं संदेश हो जाना
न पत्र न तुम बस स्वयं मेरी बात हो जाना
उनकी कलाई पर यह प्रेम पवित्री बाँधते बाँधते ,मेरी संवेदनाओं को ही बाँध आना..
धीरे धीरे मेरी अधीरता ही बाँध आना
धैर्य से उन्हें भी बेचैन कर आना....
श्रीश्यामाश्याम
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