भाषा भाव इशारा
भाषा...भाव इशारा
तरंगो का रूपांतरण ..
भावनाओं का स्पंदन ..
भावों का इशारा ..,
यह ही है भाषा कि परिभाषा ...
सखी !!!
भाषा मात्र शब्दों की रचना नहीं ..
भाषा तो भाव का इशारा हैं प्रेमास्पद का ,जो सिर्फ़ प्रेमी समझ पाए
प्रेम को प्रेम ही समझे
जब उनकी तरंग मेरी उमंग
मेरी उमंग उनकी तरंग हो जाए ..
सखी यह ही हृदय से हृदय की एक बात हो जाए तो यह ही भाषा की परिभाषा कहलाये ..
भाषा है क्या ?
भावनाओं का स्पंदन ..
स्पंदन है क्या ?
तरंगो का उमगन ..
यह उमगन है क्या ?
झूमती दशा ..प्राण का उमंग
सखी यह उमंग है क्या ?
प्रेम रस रंग री बाँवरी ...
और यह रसरंग तरंग उमंग सब वही है ..
रसों वै सः
हाँ सखी प्यारी ..
देखो रस से रसात्मक भाषा का प्रादुर्भाव अर्थात प्रेम से प्रेम ही प्रकट है।
सो हर वर्ण अलंकार शब्द आदि ..का अपना अपना रस है रंग है,क्योंकि प्रेम से स्फुरित ,प्रेम से ही उद्भूत है
सखी प्रेम के इलावा शेष कुछ न ..
प्रेम से जपो
या प्रेम को जपो
शेष प्रेम ही रहा ....
श्री वृंदावन 🌺🙏🌺
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