मधुरता की ओर

मधुरता की ओर

तुम्हारी आनंद हास्य युक्त मुख राशि का प्रतिबिम्ब हृदय में झलकता पाया 
जब तुम्हारे श्री विग्रह का पूजन कर तुमको अपने जीवन में चाहा ..

सुखद ज्ञान ज्योति की निर्मल धारा कृपावत निर्झर बहता पाया 
जब तुम्हारे अनुभव हेतु अपने मन को गुरु चरणो में लगाया ..

हाँ मेरे श्रीनवरस की मूर्ति विमल
  श्री मदन मोहन किशोर नवल 
तभी मैंने तुम्हें सर्वत्र व्याप्त पाया 

तन मन वचन न शेष थे तुमसे 
अखिल भुवन कुलभूषण श्री नंदनंदन को ही अपने सजल नेत्रो से प्रेम पूरित अश्रुओ में बहता पाया ...

जय जय जय जय 
मैं करती उसी शशि दीप का वंदन 
जिसको मैंने अपने प्रेम उमंगो में सदैव निकट अखंड उज्जवल रस के आनंद महानन्द में लहराता पाया ..

श्री वृंदावन 
श्री श्यामा श्याम 🌷🙏🌷

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