लज्जा और श्रृंगार

*लज्जा और श्रृंगार*

श्री प्रिया की लज्जा ही श्री प्रिया का श्रृंगार है सखी ..
फिर श्रृंगार क्या ??
अनंत लज्जाए जो श्री प्रिया को श्री सखियाँ धारण कराती हैं 
जानती हो क्यों ??
हित हेत
हित के हित हेत उनकी हितैषी हित अलियाँ..

प्रीतम के कौतुक हेत
प्यारी के विलसने हेत 

प्रीतम के उलझने हेत
प्यारी के सिहरने हेत 

प्रीतम के रसोन्मत्त हेत
प्यारी के रसप्रवाह हेत

अनेक अनेक श्रृंगार रूपी लज्जाएँ धारण कराती पियप्यारी की हितैषी हित अलियाँ ..

ये लज्जा यह श्रृंगार ही तो विलसने विलसाने का आमंत्रण हैं ..
किस हेत??

रस मग्न होने हेत

फ़ूल से गुलकंद होने हेत 

रस से तरंग हो जाने हेत

 रंग में राग हो जाने हेत

लाड़ से लज्जा धारण कराती 
पुनः लज्जा के निवारण हेत 
हितमयी विल्सनो के निदान हेत ..
श्री प्रिया की प्रियकारिणी श्री हित अलियाँ ..
ये अलीयाँ ही श्रृंगार के रूप मे 
प्यारी की हैं लज्जा वपु।

श्री वृंदावन 🍀🙏🍀

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम बोध

पक्षी तू कब उड़ेगा

रोग कृपा