सारँग संदेश
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*सारंग संदेश*
शीतल शीतल पवन का झकोर ..
सुर सरिता का महानद शोर ...
मोर कोयलों की कूककिलोल ..
संदेश देते कि सौंदर्य अब सजने को है ।
मध्यम मध्यम सा उजला भोर ..
सृजन हुआ नव जोवन ज़ोर ..
रतिरंग रस की चपल क्रीड़ाओं में
मचल उठे लोभी युगल नयन चकोर ..
हाव भाव की विविध भंगिमाओं में
बढ़ चला नवीन उमंगों का दौर ..
संदेश देते ,ये इशारे शरारती होने को हैं ।
अलसाई नींदों में रात्रि का चंचल संस्मरण ..
पुलकित हो उठा श्रमित शिथिल अंग अंग ..
संदेश देते रोमांच अब रिसने को है
बहार में बिहार विलसने को हैं ।
रूप सुधा के मद बहाव में ..
नव यौवन के रस स्राव में मुदित हो उठा प्रेम अनंग तरंग ..
संदेश देते शृंगार अब संग होने को हैं।
महाविनोद की अनुरागी दशाओं में
निखरती रही अरुणाई तरुणाई ..
विलसे रोम रोम की मदन अंगड़ाई ..
संदेश देते पुलकने और खिलने को हैं।
सुन री सहेली !!
कौन हैं जो खेल गया ..
झूमते मधुरासव में बह गया ..
संदेश देते
तेरे भीतर की ललिताई अपने सुहाग में और सघन होने को हैं ।
*सारङ्गाई नविता सखीजू*
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