आरती सजनी जू

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*आरती सजनी ज़ू*

*लोलुप्ता जगाने हेतु* 
     *ऊष्णसजनी का न्योता*

आठों याम सेवा में रहती 
     उष्णिमा रजनी श्री अग्नि सजनी 
झूम झूम बलियाँ उतारे 
      नील पीत को ललित रंग में घेरे 
आलस निवारे श्री आरती रमणी
भोर साँझ या मध्य मधु काल ..
  कहती झूमो खेलो हेलो मेरे युगल रंग गुलाल ..
  फहर फहर लहराती इठलाती..
  नाट्यकला का रस बिखरती 
    उछाले युगल  प्रेम ज्योति ..
आर्त उतारने के बहाने 
नव नव उत्साहों की लोलुपता जगाने आती प्यारी ऊष्ण सजनी  ...
प्रेम के रस में प्रेम की अग्नि होकर स्वागत करती प्रेम माधुरी 
स्नेह रसों का न्योता देने आती 
सजाती प्रीत की अग्नि सजनी ...
श्री आरती सजनी ...

श्री हरिदास🙏🌷🙏

*आर्त नविता सखीजू*

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