खिले ललित वृन्दावन
*खिले ललित वृन्दावन*
अंग अंग केलिकलोल से रसमत्त
महाआनंद रूप सेज में सजे ...
नैनो से नैना लड़े
अधर से अधर
अंग अंग अपनी जांति पाँति में मिले
कटि से कटि
उर से उर
प्राण से प्राण ..
मन से मन ..
स्वाश प्रश्वास के श्रमित अवगाहन में
प्रकटे रोम रोम पर श्रम जल कण ..
अद्भुत बिहार श्री युगल बिहारी को
खिले खिले और खिले
हिय में श्री ललित वृन्दावन..
जय जय ललित लतानी
रस सुरभाइयाँ
*श्री हरिदास*🌹🙏
Comments
Post a Comment