भक्ति देह की वस्तु नही
भक्ति देह की वस्तु नहीं
पर जब देह में प्रकट होती है
तब अपना क्रियात्मक स्वरूप भी दर्षन कराती है
भक्ति का सम्बंध भाव से है
भाव का सम्बंध भगवान से है
भाव शून्यता कभी भक्ति नही होती
महज एक सेवा अभ्यास
पर निष्काम अभ्यास भी भाव राज्य तक ले ही जाता है ।
क्योकि अभ्यास से सब सुलभ है
श्री गीता में भी अभ्यास योग पर ज़ोर दिया है ।
अतः
प्रभु के लिए किया अभ्यास भी भाव से कम नही ।
अतः
जब तक जीवन है भजन का अभ्यास बना रहे ।
यह ही जीवन का लक्ष्य ।।
श्री राधा 🌷🌷🌷
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