प्रेम उपचार
*प्रेम उपचार*
औपचारिकताएँ और प्रेम साथ नही चल सकते।
प्रेम जब चलता है तो अकेले चलता है
इसी कारण प्रेमी अटपटा होता है ।
कारण संसारी शिष्टाचार ज़्यादा देखते और पसन्द करते है ।
प्रेम का उपचार भी यही है की जो वो नही है , उसका कदापि सँग भी न हो ,तभी प्रेम अपने में गरजता हुआ गतिमय होता है।
बाधा है नही कही बस असहजता ही बाधा बनी पड़ी इसकी ।
Comments
Post a Comment