श्यामगौर झुमाइयाँ

*श्यामगौर झुमाइयाँ*

पियप्यारी का परस्पर अनुराग ही झूला है ।
और निरंतर सँग बने रहना  निमिष मात्र भी असंग न होना यही इनका झूलना है ।
परस्पर का खिंचाव ही इनका सुहाग है वह झूलन की डोरी है ।
और  खिंचाव रूपी डोरी से बढ़ता स्नेहराग ही इस झूलन की गति को बढ़ावे झुमावे खिलावे ।
कैसे झुमाते झुमते ये झूलन झूले 
कभी तो अँखियों के निहारन में 
कभी तो परस्पर बाहों में भर जाने से 
कभी तो श्रृंगारों के आपस मे उलझ जाने से ,
एक दूसरे में हिलमिल जाने से..
कभी तो परस्पर की किलकारियों में 
प्रफुल्ल हो जाने से ..
मधुर सुमधुर हर्ष वर्षण रस वर्धन केलि कलापो से ..
ललचाते झुमाते मदन रंगों के तरंगों में 

यह हर्षित आह्लादित हृदय की झूलती प्रेम किलोरियाँ मदन रङ्ग की 
उछलती झुमाइयाँ ।

श्री श्यामा श्याम

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