प्रेम और मोह

*प्रेम और मोह*

प्रेम और मोह में
बहुत फर्क है ...

मोह साथ छोड़ देगा 
पर प्रेम निभना जानता है 

अपने प्रेमी के द्वारा उसके प्यार का तिरस्कृत किये जाने पर भी 
प्रेम प्रेमी का द्वार नही छोड़ता 
जबकि मोह अभिमानी है सँग छोड़ देता है ।

कौन समझेगा प्रेम को आजकल 
सब प्रेम के नाम पर औपचारिकताएं निभाते है ।
उन्हें पता ही नहीं एकांत हृदय ही प्रेम का घर है ।
इधर तो हृदय  को धर्मशाला बनाये 
प्रेम के मेहमान की आशा रखते है ।

मोहित इधर सब  प्रेमी कोई नही 
चाहत पूरी हो आधी नही ..
वरना ये छटपटाहट और बेचैनियां प्रेम में कभी मिलती ही नही !!!

असुअन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई ...
अब तो बेलि फैल गयी आनन्द फल होई ...

श्री वृन्दावन 🙏🙏🙏

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम बोध

पक्षी तू कब उड़ेगा

रोग कृपा