रसप्रेम सीढ़ियाँ
भाव ही पक कर प्रेम
बनता है
प्रेम ही पक कर रस बनता है
भाव उपलब्धि की सीढियां
1 श्र्द्धा
2 सत्संग
3 नियम
4 निष्ठा
5 अनर्थ की निवृत्ति
6 रुचि
7 आसक्ति
8 भाव
9 प्रेम
10 रस
अतः रस की प्राप्ति जिसे हो चुकी है
वह भोगों के लिए क्यो भागेगा
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