आह्लाद

*अह्लाद*

अह्लाद से राग 
      राग में आह्लाद
अह्लाद से ऋतुएँ 
      ऋतुओं में आह्लाद
अह्लाद से उत्सव
      उत्सवों में आह्लाद
  अह्लाद से रङ्ग 
       रंगों में आह्लाद 
   अह्लाद से रस तरंग 
       उछलती तरंगों में आह्लाद ..
प्रकृति के कोने कोने में रिसता आह्लाद 

फिर भी इनके करीब रहकर नही अनुभव खुद को अपना स्वअह्लाद

अहो दुर्भाग्य 
प्रपंच में कितना धँसा फँसा 
न जाने कौन ???
जिसका कोई अस्तित्व ही नही !!
रो देती अक्सर ..
मेरे 
जीवंत की जीवनी
 छुपा सा मेरा अह्लाद...

*श्री ललित वृन्दावन*

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम बोध

पक्षी तू कब उड़ेगा

रोग कृपा