प्रेम इंद्र धनुष

*प्रेम इन्द्रधनुष*

चाहत के आँच में 
      नव नव मनोरथ पकै....
अंगों में उमंग लिए 
       लाड़ में लाड  मिलै...
अंग रंग अनंग भीने 
        दुलारो के राग बढै...
प्रेम घटा के आकाश मण्डप में 
        रोमांचो के स्वर सजै...
इन्द्रधनुष के सप्त रागों में 
         चाहत के सतरंगी रंग झूलै..

श्री हरिदास 
🙇‍♂️🙏🙇‍♂️

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