प्रेम प्रणाम

🪷 प्रेम प्रणाम 🪷

प्रेम का एक में  एक  होकर भी और और एक मे एक भरते रहने की मचलन तड़पन प्रकम्पन यही तो प्रेम का अभिवादन प्रेम का प्रणाम है I 
     नित्य नित्य इस प्रणाम से प्राण प्राण को प्रणाम  मेरा हो ..
रस की रसिकता को मेरा प्रणाम हो ..
रसिक रसीली को मेरा प्रणाम हो ..

आह री ..
   रंगीली रस तुलिके 
प्राणों की  प्रेम चित्रलिपि 
   और और सरकती रहो थिरकती
रहो अनुराग रंगो में अनुराग वीटिका 
के आह्लादित स्पन्दनों में I 

जय जय 
प्रेम के महोत्सव प्रेम प्रणाम को ...

Comments

Popular posts from this blog

प्रेम बोध

पक्षी तू कब उड़ेगा

रोग कृपा