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Showing posts from May, 2022

टूटेंगी हदें

नही भरता कभी प्यार  चाहे दूर हो या पास      पाकर भी लगा कि अभी मिला ही नही  दूर से बस लगी थी एक मिलन की आस  यह मिलन  कभी बुझती नही  बुझती न ही इसकी आस और प्यास      अश्क ही उतर आए हैं इस मिलन की  उतावली में    देर नही होगी बस  थोड़ा और सब्र बस थोड़ा और सब्र  हदे टूटेंगी  तब तक बस ..

श्रीप्रिया मञ्जुल नामावली

*श्रीप्रिया मञ्जुल नामावली*     *श्रीप्रीतम हिय हारावली*  श्रीप्रीतम प्राण पालिकै श्रीललित लला आराधिकै श्रीश्याम रस सुधा निधे ।  अनन्याश्रितजना कल्पतरु ब्रजपति प्रेयसी - प्रेम वधु  सम्मिल रस तृषिते , प्रेम पिपासु ।  श्रीप्रीतम हृदय सम्पुट रस मणि  सर्वोच्च शिरोभूषण श्रृंगार मणि रस प्रवीणा , रस उत्कर्षिणी ।  दिव्य केलि हर्ष तरंगिणी रस मद पुलकितांञ्गिणी  सुरत रस रङ्गिनी  ।  पूर्ण गंभीर , अनुराग मयी , प्रेम धर्मिणी , हित मयी , आद्या रति आनन्दी , प्रीतम सुख मयी ।  रसिकनी , रस आस्वाद्या अनन्त धर्मा प्रीति प्राक्टया कुंज - केलि कला माधुरी नाट्या।  प्रीतम मनोदशा हितचिन्तिका   मनोरथ पूर्णे , रस दान तत्परा   श्यामसुन्दर सुख एकमात्र आश्रया ।     केलि बिहार रसासव निमग्ना    श्याम मनोहर रसपान अर्चना     कुशल सहेली पिय मन रचना ।  स्वानन्द अमृत भरे शोभा युक्त युगल स्तन सम्पन्ने , नमामि वात्सल्य दिव्य धरा ,युगल कुच कलश रस मण्डले।  रस केलि उद्दीपन सौंज सामग्री धरोहरें धैर्य , गांभ...

मेरी निष्ठा

मेरी निष्ठा तो कच्ची मोहन ...    क्योकि मैं  तो तेरी नकली जोगन  तू तो मेरो साँचो पिया       तू ही निभा दे यह सम्बंध सोहन ...

खिले ललित वृन्दावन

*खिले ललित वृन्दावन* अंग अंग केलिकलोल से रसमत्त       महाआनंद रूप सेज में सजे ... नैनो से नैना लड़े  अधर से  अधर    अंग अंग अपनी जांति पाँति में मिले कटि से कटि उर से उर  प्राण से प्राण .. मन से मन ..   स्वाश प्रश्वास के श्रमित अवगाहन में प्रकटे रोम रोम पर श्रम जल कण ..  अद्भुत बिहार श्री युगल बिहारी को  खिले खिले और खिले  हिय में श्री ललित वृन्दावन..       जय जय ललित लतानी               रस सुरभाइयाँ *श्री हरिदास*🌹🙏

आरती सजनी जू

*DONOT SHARE* *आरती सजनी ज़ू* *लोलुप्ता जगाने हेतु*       *ऊष्णसजनी का न्योता* आठों याम सेवा में रहती       उष्णिमा रजनी श्री अग्नि सजनी  झूम झूम बलियाँ उतारे        नील पीत को ललित रंग में घेरे  आलस निवारे श्री आरती रमणी भोर साँझ या मध्य मधु काल ..   कहती झूमो खेलो हेलो मेरे युगल रंग गुलाल ..   फहर फहर लहराती इठलाती..   नाट्यकला का रस बिखरती      उछाले युगल  प्रेम ज्योति .. आर्त उतारने के बहाने  नव नव उत्साहों की लोलुपता जगाने आती प्यारी ऊष्ण सजनी  ... प्रेम के रस में प्रेम की अग्नि होकर स्वागत करती प्रेम माधुरी  स्नेह रसों का न्योता देने आती  सजाती प्रीत की अग्नि सजनी ... श्री आरती सजनी ... श्री हरिदास🙏🌷🙏 *आर्त नविता सखीजू*

सारँग संदेश

*DONOT SHARE* *सारंग संदेश* शीतल शीतल पवन का झकोर .. सुर सरिता का महानद शोर ...  मोर कोयलों की कूककिलोल ..           संदेश देते कि सौंदर्य अब सजने को है । मध्यम मध्यम सा उजला भोर .. सृजन हुआ नव जोवन ज़ोर .. रतिरंग रस की चपल क्रीड़ाओं में  मचल उठे लोभी युगल नयन चकोर .. हाव भाव की विविध भंगिमाओं में  बढ़ चला नवीन उमंगों का दौर ..      संदेश देते ,ये इशारे शरारती होने को हैं । अलसाई नींदों में रात्रि का चंचल संस्मरण .. पुलकित हो उठा श्रमित शिथिल अंग अंग ..     संदेश देते रोमांच अब रिसने को है  बहार में बिहार विलसने को हैं । रूप सुधा के मद बहाव में ..   नव यौवन के रस स्राव में मुदित हो उठा प्रेम अनंग तरंग ..    संदेश देते शृंगार अब संग होने को हैं। महाविनोद की अनुरागी दशाओं में    निखरती रही अरुणाई तरुणाई .. विलसे रोम रोम की मदन अंगड़ाई ..    संदेश देते पुलकने  और खिलने को हैं।       सुन री सहेली !! कौन हैं जो खेल गया ..   झूमते मधुरासव में बह गया .. संदेश देते...