मेरे प्रेम जू
मेरे प्रेम जू हे कन्दर्प रेख रस रंजत नयन युगल मेरे प्रेम जू मैं क्या हूँ या क्या नहीं इतना विचार विवेक मुझमे नहीं पर इतना जानती तुम्हारी हूँ तुमसे हूँ तुममें तुम्हारा प्रेम अभंग हूँ .. छोटी सी तुम्हारी प्रेमांकुर के मुक्त प्रसर से झरी एक चपल झरण हूँ .. चाहती तुम्हारा वही घनीभूत ललित संग हूँ हे मेरे प्रेम.. मम जीवनम इस जीवन की क्रियाशीलता में जड़ न हो जाऊँ .. सदैव स्मृत कराना कि मैं वही प्रेम चेतना से भरा हुआ रंग हूँ ... श्री वृंदावन श्री श्यामा श्याम 🌷🙏🌷